जब शिवाजी महाराज़ ने अफ़जल खान को निहत्थे ही पराजित किया

शिवाजी महाराज ने महज़ 17 वर्ष की अवस्था में ही युद्ध में पारंगत हासिल कर ली थी. उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेकों लड़ाईयां लड़ी. लेकिन, उन सबमें अफ़जल खान से की गई युद्ध सबसे यादगार और दिलचस्प माना जाता है. जानकारी के अनुसार, अफ़जल खान का कद शिवाजी के मुकाबले बहुत लम्बा था. लेकिन, फिर भी शिवाजी ने निहत्थे ही अपनी बुद्धी का इस्तमाल करते हुए अफ़जल खान को मौत के घाट उतार दिया था. जिसके बाद शिवाजी ने यह साबित कर दिया था कि युद्ध में जीत हासिल करने के लिए बलवान शरीर का होना जरुरी नहीं होता बल्कि,तीव्र और शातिर दिमाग का भी होना बेहद जरुरी होता है.

दरअसल,शिवाजी महाराज और अफ़जल खान की जब लड़ाई प्रारम्भ हुई तो उसमें अफ़जल खान के पास दोगूनी सेना होने के बावजूद भी उसकी सेना और सम्राज्य का काफी नुकसान हो रहा था.जिसके बाद अफ़जल खान ने छल के बदौलत युद्ध जितने की योजना बनाई. और इसी योजना अंतर्गत उसने शिवाजी को भोजन पर निमंत्रण दिया. और भोजन ग्रहण करने के बाद गले लगने के बहाने वार किया. लेकिन शिवाजी महाराज ने बचाव करते हुए अपने हाथ में कड़े से वार कर दिया. कड़े में विष होने के कारण अफ़जल खान की मौत हो गई.

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