2019 लोकसभा चुनाव: गुजरात में BJP के लिए इस बार कड़ा मुक़ाबला

लोकसभा के तीसरे चरण के चुनाव में भाजपा के लिए गुजरात सबसे अहम हैं। इसकी कई वजह हैं। एक तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गृह राज्य है। दूसरे, पिछले चुनाव में राज्य की सभी 26 सीटें भाजपा ने जीती थीं। मगर, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। ऐसे में भाजपा के लिए इस बार राज्य की सभी लोकसभा सीटों को बचाना आसन नहीं होगा।

2014 के लोकसभा चुवाल में हिन्दी राज्यों में भाजपा ने शानदार प्रर्दशन किया था। सिर्फ एक गैर हिन्दी राज्य गुजरात था, जहां भाजपा ने सभी 26 सीटें जीती थीं। तब यह माना गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुक्यमंत्रित्व काल की उपलब्धियों और उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए लोगों ने एकजुट होकर भाजपा को जिताया। नतीजा यह हुआ कि 2009 में गुजरात की 11सीटें जीतने वाली कांग्रेस पिछले चुनाव में यहां से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। भाजपा ने रिकार्ड 59 फीसदी वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस 33 फीसदी मतों तक सीमित रह गई।

पांच साल में कई बदलाव हुए
पिछले पांच वर्षों में गुजरात में कई राजनीतिक घटनाएं हुई हैं, जो इस बार चुनावों पर असर डाल सकती हैं। सबसे बड़ा घटनाक्रम ओबीसी दर्जे के लिए पटेल समुदाय का आंदोलन रहा है। हार्दिक पटेल के नेतृत्व में 2015 में बड़ा आंदोलन हुआ। हार्दिक अब कांग्रेस में हैं और भाजपा को हराने में जुटे हैं। राज्य में करीब 21 फीसदी पटेल मतदाता हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा का साथ दिया था। माना जा रहा है कि इस बार पटेल समुदाय के वोट भाजपा और कांग्रेस में बंट सकते हैं।
विधानसभा चुनाव का असर
गुजरात में दिसंबर 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे भी इन चुनावों पर असर डाल सकते हैं। विधानसभा चुनावों के नतीजों से पता चलता है कि राज्य में कांग्रेस मजबूत हुई है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 33 फीसदी वोट मिले थे, जबकि विधानसभा चुनाव में यह प्रतिशत बढ़कर 41 फीसदी तक पहुंच गया। यानी आठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई। जबकि, भाजपा का मत प्रतिशत 59 से घटकर 49 रह गया। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की 20 सीटें बढ़ीं, जबकि भाजपा की 16 सीटें कम हो गईं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि विधानसभा चुनावों को पैरामीटर माना जाए तो भाजपा को इस बार करीब नौ सीटों का नुकसान हो सकता है।

जीएसटी और पटेल आरक्षण अहम मुद्दे
राज्य के अहम चुनावी मुद्दों में इस बार जीएसटी, पटेल आरक्षण, नोटबंदी और किसानों की समस्याए हैं। सबसे बड़े पटेल समुदाय के बीच ये सभी मुद्दे हावी हैं। क्योंकि, पटेल किसान भी हैं, व्यापारी भी हैं और आरक्षण की मांग से भी जुड़े हैं।
भाजपा का मजबूत पक्ष
भाजपा गुजरात के गौरव के मुद्दे को इन चुनावों में भुना रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए गुजरात की जनता से अपील की जा रही है। भाजपा का तर्क है कि जब मोदी गुजरात में मुख्यमंत्री थे तो केंद्र में दस साल कांग्रेस की सरकार रही, जिसने राज्य का विकास नहीं होने दिया। जबिक, पिछले पांच सालों में मोदी सरकार ने राज्य के लिए काफी कुछ किया है और आगे भी करेगी।

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