बॉलीवुड हो गया है बोरिंग या राजनीति हो गयी है दिलचस्प, जानिए क्या है पूरा माजरा?

लोकसभा चुनाव के 7 चरणों को पूरा होने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है.. जी हां लोकसभा चुनाव 2019 के तीन चरण पूरे हो चुके हैं और चौथा आने वाली 29 अप्रैल को होना है.. क्या आपने ये सोचा है कि इस बार के चुनाव में क्या खास है या फिर क्या अलग है। अगर नहीं सोचा है तो हम आपको थोड़ा सा क्लू दे देते हैं…दरअसल इस बार का चुनाव एक मल्टीस्टारर मूवी के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट जैसा लग रहा है। क्योंकि राजनितिक पार्टियों में एक के बाद एक फिल्मी सितारों की एन्ट्री हो रही है। मजे कि बात ये है कि जहां एक तरफ किसी भी एक पार्टी के कार्यकर्ता अपनी पूरी जान लगा देते हैं नाम कमाने में, लोगों के साथ जुड़ने में, उनकी समस्याऐओं को जानने और उनकी मदद करने में… जो कार्यकर्ता सालों तक पूरे पूरे दिन कड़ी मेहनत करते हैं कि एक दिन उन्हें पार्टी से टिकट मिलेगा तो अचानक उनकी मेहनत पर शोहरत की रंगत ज्यादा प्रभावशाली पड़ जाती है।

राजनीतिक जगत का हाल कुछ ऐसा हो गया है कि बालीवुड के जाने माने चेहरों को अपने नाम का इतना फायदा मिल रहा है कि जिन्होंने सुबह पार्टी के अध्यक्ष से मुलाकात की तो शाम तक उन्हें पार्टी ने टिकट भी दे दिया और भाजपा की बात करें तो इस चुनाव में लाल कृष्ण आडवाणी, सुमित्रा महाजन, जैसे दिग्गज नेता चुनावी मैदान से नदारद नजर आ रहे हैं। पार्टी के प्रचार प्रसार में भी य़े चेहरे कहीं न नजर नहीं आए। अगर हाल ही कि बात करें तो सनी देओल ने बीजेपी में एंट्री कर ली है और शाम होते होते उन्हें पंजाब के गुरदासपुर से टिकट भी दे दिया गय़ा। हो सकता है कि ये सनी देओल के फैंस के लिए अच्छी खबर रही हो लेकिन शायद आम आदमी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है.. क्योंकि समाज विकास मांगता है। हर कोई विकास का चेहरा देखने का इच्छुक है… सवाल ये है कि देश का भविष्य़ किन के हाथों में सौंपा जा रहा है।

बीजेपी से कांग्रेस में आए शत्रुघ्न सिन्हा राजनीति की अच्छी समझ रखते हैं जिन्हें पटना साहिब से टिकट दिया जा चुका है लेकिन बालिवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर की कांग्रेस में हुई यंग एंट्री पर भी बहुत से सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी के साथ शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी ने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली है…जबकि इन एक्टर्स को जिन जगह से टिकट दिया गया है वहां उनकी लोकप्रियता बेहद ही कम है। अब एक मिनट रुककर ये सोचना तो बनता है कि आखिर ये चल क्या रहा है। राजनीति में जिस तरह से एकट्रस की एंट्री हो रही है उससे तो ये लगता है कि ये चुनाव किसी फिल्म से कम नहीं है.. हो सकता है कि जिसका सिक्का बॉलीवुड में न चल पाया तो वो राजनीति में अपना करियर बनाने निकल पड़ा हो।

x

Check Also

अक्साई चीन के बदले तवांग को क्यों चाहता है चीन?

🔊 Listen to this अक्साई चीन, पाकिस्तान और भारत के संयोजन में तिब्बती पठार के उत्तरपश्चिम में स्थित एक विवादित ...

error: Dont Copy !!